छोटे बच्चों को हिचकी क्यों आती है?HealthPlanet

Posted on Sat 22nd Oct 2022 : 10:29

हिचकी से परेशान हो रहा है शिशु, तो इन तरीकों से दिलाएं आराम
बच्‍चों को अक्‍सर हिचकियां आती रहती हैं और आपको जानकर हैरानी होगी कि बच्‍चे गर्भ में ही हिचकियां लेना शुरू कर देते हैं।
छोटे बच्‍चों को हिचकियां ज्‍यादा आती हैं और बार-बार हिचकी आने की वजह से बच्‍चे को परेशानी भी होती है। बच्‍चे को परेशानी में देखकर अक्‍सर मांएं भी दुखी हो जाती हैं और हिचकी को दूर करने के तरीकों के बारेमें सोचने लगती हैं।

हालांकि, आपको हिचकी दूर करने के उपायों के बारे में जानने से पहले इसके कारण के बारे में जान लेना चाहिए। इससे आप आसानी से बच्‍चे को आ रही हिचकियां बंद कर सकती हैं।
​शिशु को हिचकी आने का कारण

शिशु मां के पेट में ही हिचकियां लेना शुरू कर देते हैं और इसकी शुरुआत होती है प्रेग्‍नेंसी की दूसरी तिमाही से। जन्‍म के बाद शिशु को हिचकी आने के हो सकते हैं :

इसमें पेट में मौजूद खाना वापस भोजन नली में चला जाता है। शिशु का रिफक्‍स पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है। खाने के वापस भोजन नली में जाने और नसों की कोशिकाओं में एसिड ट्रिगर करने पर डायफ्राम में दिक्‍कत होने लगती है जिससे हिचकियां शुरू हो जाती हैं।

मां का दूध या बोतल से भी ज्‍यादा दूध पीने पर बच्‍चे का पेट फूल सकता है। पेट के अचानक फूलने पर डायफ्राम खिंच जाता है जिससे ऐंठन शुरू होती है। इससे बच्‍चे को हिचकियां आती हैं।
​एलर्जी और अस्‍थमा भी हैं कारण

बच्‍चे को फॉर्मूला मिल्‍क या ब्रेस्‍ट मिल्‍क में मौजूद किसी प्रोटीन की वजह से भोजन नली में सूजन आ सकती है। इसमें डायफ्राम में दिक्‍कत होती है जिससे हिचकियां आने लगती हैं।

इसके अलावा अस्‍थमा में फेफड़ों की ब्रोंकाइल ट्यूबों में सूजन आती है जिससे फेफड़ों तक हवा नहीं पहुंच पाती है। इससे सांस लेने में दिक्‍कत होती है और घरघराहट रहती है। इसकी वजह से डायफ्राम में ऐंठन उठती है और हिचकियां शुरू हो जाती हैं।
हिचकियां रोकने के तरीके

शिशु को हिचकियां आना शुरू होने पर आप कुछ घरेलू नुस्‍खों की मदद से इसे रोक सकती हैं :

अगर बच्‍चे ने ठोस आहार खाना शुरू कर दिया है जो उसकी जीभ पर थोड़ी-सी चीनी रख दें। अगर बच्‍चा छोटा है तो उसके पैसिफायर में ताजा शुगर सिरप रखकर मुंह में डाल दें।
हिचकियां आने पर शिशु को अपनी गोद में उल्‍टा लिटाएं या कंधे पर रखें और उसकी पीठ को सर्कुलर मोशन में मलें।
हर बार दूध पिलाने के बाद बच्‍चे को कंधे पर रखकर डकार जरूर दिलवाएं। इससे डायफ्राम सही पोजीशन में रहता है। आप डकार दिलवाने के लिए उसकी पीछ को भी थपथपा सकती हैं।
शिशु की हिचकियां रोकने के लिए आप ग्राइप वॉटर का भी इस्‍तेमाल कर सकती हैं। साफ पीने के पानी में ग्राइप वॉटर मिलाकर दें।

​जब ज्‍यादा आने लगे हिचकियां

नवजात शिशुओं और छोटे बच्‍चों को अमूमन हर रोज कुछ मिनट या एक घंटे के लिए हिचकियां आती ही हैं। अगर बच्‍चा खुश है और उसे इससे कोई परेशानी नहीं हो रही है जो चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन अगर हिचकियां कम होती नजर नहीं आ रही हैं और इसे काफी देर हो गई है यह किसी परेशानी का संकेत हो सकता है।

वहीं अगर हिचकियां लेते समय घरघराहट की भी आवाज आ रही है तो आपको डॉक्‍टर से परामर्श करना चाहिए।

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